नक्सल पीड़ित युवाओं को मिली बड़ी राहत

5 सितंबर 2026

सरकार का यह निर्णय पीड़ित परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नक्सल पीड़ित युवाओं को मिली बड़ी राहत

जगदलपुर (कांगेर लाइव) - बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा से जोड़ने के लिए बस्तर फाइटर्स में 4,600 आरक्षकों की सीधी भर्ती की जाएगी। गृह विभाग ने भर्ती नियमावली तैयार कर ली है और पुलिस मुख्यालय की ओर से जल्द अलग से विज्ञापन जारी किया जाएगा।

200 अंकों की होगी चयन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी इसमें 100 अंकों की शारीरिक दक्षता परीक्षा और 100 अंकों की लिखित परीक्षा शामिल होगी। शारीरिक दक्षता परीक्षा में लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक तथा 100 और 800 मीटर दौड़ शामिल होगी। सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत और एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं।

इस प्रावधान से नक्सल प्रभावित परिवारों के युवा सम्मानजनक रोजगार हासिल कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ेंगे। सरकार का यह निर्णय पीड़ित परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय संस्कृति और भाषा की बेहतर समझ रखने वाले युवा पुलिस एवं सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्थानीय युवाओं की भागीदारी से पुलिस और ग्रामीणों के बीच संवाद एवं विश्वास भी मजबूत होगा। साहू ने शासन से आग्रह किया कि भर्ती की जानकारी नक्सल पीड़ित परिवारों और राहत शिविरों में रहने वाले पात्र युवाओं तक गांव-गांव पहुंचाई जाए, ताकि इस अवसर से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवाओं को रोजगार से जोड़ना शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जानकारी के अभाव में कोई भी योग्य युवा

महिलाओं, होमगार्ड और पूर्व सैनिकों को भी आरक्षण

भर्ती में स्थानीय महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत, तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके होमगाइर्स के लिए 25 प्रतिशत और पूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। चयनित जवानों को एनपीएस या यूपीएस में से किसी एक पेंशन योजना का विकल्प भी दिया जाएगा।

स्थानीय युवाओं और भाषा को प्राथमिकता

बस्तर फाइटर्स भर्ती की खासियत स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना है। संबंधित जिले का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य रखा गया है, जबकि स्थानीय भाषा-बोली का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को 20 बोनस अंक मिलेंगे। इससे बस्तर के अंदरूनी और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने का बेहतर अवसर मिलेगा।


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