कोयलीबेड़ा की 18 पंचायतों में सर्वे शुरू

5 सितंबर 2026

कलेक्टर के निर्देश का तत्काल असर, तीन दिन गांवों में डेरा डालकर तैयार होगा विकास का खाका।

कोयलीबेड़ा की 18 पंचायतों में सर्वे शुरू

कांकेर (कांगेर लाइव)- वर्षों से विकास की बाट जोह रहे कोयलीबेड़ा ब्लॉक की 18 पंचायतों में अब बदलाव की उम्मीद जगी है। कभी घोर नक्सल प्रभावित और अति संवेदनशील माने जाने वाले इस इलाके में माओवादियों का प्रभाव खत्म होने के बाद प्रशासन ने अब विकास को जमीन पर उतारने की कवायद शुरू कर दी है। इस बार विकास की फाइलें सिर्फ दफ्तरों में बैठकर तैयार नहीं होंगी, बल्कि जिले के अफसर खुद जंगल में उतर गए हैं। गांव गांव पहुंचकर सर्वे शुरू हो चुका है और तीन दिनों तक अधिकारी इसी इलाके में कैंप कर विकास की जरूरतों का खाका तैयार करेंगे। कांकेर जिले के नए कलेक्टर कुंदन कुमार ने गुरुवार को कोयलीबेड़ा क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सीधे सुनी थीं। जगह-जगह आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी अपनी मांगें कलेक्टर के सामने रखीं। ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके से ही जिला स्तरीय अधिकारियों को 18 पंचायतों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति का सर्वे करने और ग्रामीणों के बात सुनने का मुहिम चलाने का अभियान छेड़ा।

दिनभर गांवों में सर्वे, रात को वहीं तैयार होगी रिपोर्ट

इस अभियान में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान जिला स्तर के अधिकारी रात में जिला मुख्यालय वापस नहीं लौटेंगे। दिनभर गांवों में सर्वे करने के बाद उन्हें वहीं रुककर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके बाद नोडल अधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट कलेक्टर तक भेजी जाएगी। यानी इस बार कोयलीबेड़ा के विकास की फाइलें ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर नहीं, बल्कि जंगल और गांव की जमीन पर उतरकर तैयार हो रही हैं। वर्षों से उपेक्षित इस इलाके में प्रशासन की यह मैदानी कवायद आने वाले दिनों में विकास की नई तस्वीर खींच सकती है।

विकास की जरूरतों का खाका तैयार करने के निर्देश दिए

कलेक्टर के निर्देश का असर अगले ही दिन दिखाई दिया। गुरुवार को कलेक्टर के दौरे के बाद कई विभागों के अधिकारी देर रात वापस लौटे थे, लेकिन शुक्रवार सुबह होते ही जिला स्तर के अधिकारियों की टीम फिर कोयलीबेड़ा पहुंच गई। अधिकारियों ने गांवों में पहुंचकर सर्वे का काम शुरू कर दिया। इस बार अफसर सिर्फ कागजों में दर्ज आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार नहीं कर रहे हैं, बल्कि मौके पर पहुंचकर यह देख रहे हैं कि गांवों में वास्तव में क्या है और क्या नहीं है। ग्रामीणों को किन सुविधाओं की जरूरत है, कौन-सी सुविधाएं उपलब्ध हैं, कौन-से काम अधूरे हैं और किन क्षेत्रों में तत्काल विकास की आवश्यकता है, इसकी जानकारी मौके पर जुटाई जा रही है।

तीन दिन जंगल में कैंप, गांव-गांव पहुंचेगी टीम

18 पंचायतों में सर्वे का काम तीन दिनों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। पहले दिन शुक्रवार को कोयलीबेड़ा, कौड़ी सालेभाट, उदनपुर, जीरम तराई, कामतेड़ा और सुलंगी पंचायतों में सर्वे का काम शुरू किया गया। वहीं शनिवार और रविवार को शेष 12 पंचायतों में अधिकारी पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपने-अपने विभाग से जुड़ी सुविधाओं और जरूरतों की जानकारी जुटाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर योजना तैयार की जा सके।


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