डिजिटल दौर में युवाओं का अधिकांश समय मोबाइल, सोशल मीडिया और तकनीक के साथ बीत रहा है। इसके कारण उनका प्रकृति, जंगल और वन्यजीवों से सीधा जुड़ाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसी दूरी को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग ने YUVAN (युवा + वन) पहल शुरू की है।
इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को प्रकृति के करीब लाना और उन्हें पर्यावरण एवं जैव-विविधता के संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाना है। इसके तहत युवाओं को केवल कक्षाओं में जानकारी देने के बजाय जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में ले जाकर प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाता है।
कार्यक्रम में युवा पक्षियों की पहचान और निगरानी, तितलियों का अध्ययन, वन्यजीव संरक्षण, औषधीय पौधों की जानकारी, आर्द्रभूमि संरक्षण और जैव-विविधता के दस्तावेजीकरण जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
इसके अलावा स्वयंसेवकों को वृक्षारोपण, सीड बॉल तैयार करने, जल एवं मिट्टी संरक्षण, वनाग्नि की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें प्रकृति की व्याख्या, वन्यजीव फोटोग्राफी और जैव-विविधता से जुड़ी जानकारी जुटाने का अवसर भी मिलता है।
इस पहल से जुड़े कई युवाओं के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। कुछ स्वयंसेवक अब सांपों को सुरक्षित तरीके से बचाने, पक्षियों की रक्षा करने और ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का काम कर रहे हैं।
YUVAN का विस्तार अब स्कूली बच्चों तक भी किया जा रहा है। “जूनियर YUVAN” के तहत बच्चों को जंगल भ्रमण, पक्षी एवं जैव-विविधता अवलोकन, बीज गेंद तैयार करने, औषधीय पौधों की पहचान और पर्यावरण संबंधी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
इस पहल से लगभग 500 युवा स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार हो चुका है। वन विभाग की योजना है कि स्थानीय युवा अपने क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने के साथ-साथ वनाग्नि की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में समुदाय और वन विभाग के बीच सहयोग की भूमिका निभाएं।
बस्तर जैसे प्राकृतिक संसाधनों और जैव-विविधता से समृद्ध क्षेत्र में ऐसी पहल विशेष महत्व रखती है। स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ने से जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को नई मजबूती मिल सकती है।