माओवादी संगठन छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे कई युवा अब सामान्य पारिवारिक जीवन शुरू करना चाहते हैं। संगठन में रहते हुए जिन लोगों की नसबंदी कराई गई थी, उनमें से 200 से अधिक आत्मसमर्पित माओवादियों ने अब नसबंदी खोलने की इच्छा जताई है।
सरकार आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत इस मांग पर आगे बढ़ रही है। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को बस्तर बुलाने की तैयारी है। विशेष चिकित्सा शिविर में इच्छुक लोगों की स्वास्थ्य जांच के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया की जाएगी।
संगठन में रहते कराई गई थी नसबंदी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, माओवादी संगठन में शामिल होने वाले कुछ युवाओं की उस दौरान नसबंदी कराई जाती थी। आत्मसमर्पण के बाद इनमें से कई युवक विवाह कर अपना परिवार बसाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन के सामने नसबंदी खोलने में मदद की मांग रखी है।
बस्तर में लगेगा विशेष चिकित्सा शिविर
अधिकारियों के मुताबिक, 200 से अधिक आत्मसमर्पित माओवादी इस चिकित्सा प्रक्रिया के लिए इच्छुक हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बस्तर पहुंचकर शिविर में जांच करेगी और पात्र मामलों में आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया पूरी करेगी। इस पहल को आत्मसमर्पित लोगों के पुनर्वास कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
बस्तर क्षेत्र में इससे पहले भी आत्मसमर्पित माओवादियों की नसबंदी खोलने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं ली जा चुकी हैं। सुकमा समेत अन्य इलाकों में लगाए गए शिविरों में कई लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।
राजनांदगांव में भी ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जहां नसबंदी खुलवाने के बाद आत्मसमर्पित माओवादियों ने विवाह किया और बाद में वे पिता बने। इन मामलों के बाद परिवार बसाने की इच्छा रखने वाले अन्य आत्मसमर्पित लोगों को भी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।
पुनर्वास में पारिवारिक जीवन पर भी जोर
आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास का उद्देश्य उन्हें हिंसा से दूर कर सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ना है। परिवार बसाने की उनकी इच्छा को देखते हुए सरकार अब पुनर्वास के मानवीय पहलू पर भी ध्यान दे रही है। उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी पुनर्वास की समीक्षा के दौरान इस विषय पर अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।